धारा का चुम्बकीय प्रभाव
February 21, 2026
धारा का चुम्बकीय प्रभाव:- 25/10/24
चुम्बक का खोज मैग्नेशिया में हुआ, इस वजह से इसे मैग्नेट कहते हैं।
स्वतंत्रता पूर्वक लटका चुम्बक उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थित होता है।
दिशा बताने के गुण के कारण चुम्बक को लोड स्टोन कहते हैं।
ध्रुव :- चुम्बक का वह क्षेत्र जहाँ आकर्षण सबसे अधिक होता है ध्रुव कहलाता है।
चुम्बक में दो ध्रुव होते हैं उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव
एकल आवेश संभव है।
एकल ध्रुव का अस्तित्व नहीं होता है।
चुम्बकीय लम्बाई < ज्यामितीय लम्बाई = उससे कम
चुम्बक के गुण
चुम्बक के असमान ध्रुवों में आकर्षण तथा समान में प्रतिकर्षण होता है।
Note :- पृथ्वी चुम्बक की तरह कार्य करता है। यह चुम्बक नहीं है।
:- मनुष्य का शरीर चुम्बक से प्रभावित हो सकता है।
(a) नमन कोण (b) दिकपात (c) क्षैतिज क्षेत्र
:- मनुष्य का शरीर चुम्बक से प्रभावित हो सकता है।
पृथ्वी के तीन चुम्बकीय अवयव हैं।
(a) नमन कोण (b) दिकपात (c) क्षैतिज क्षेत्र
Note वज्रपात (Thunderbolt)
यह पृथ्वी के चुम्बकीय अवयव नहीं है।
नमन कोण का अधिकतम मान ध्रुव पर =
तथा न्यूनतम मान विषुवत रेखा पर =
होता है।
Q
(a)
दिल्ली में नमन कोण
है और लंदन में
है तो सही है
(a)
(b)
(c)
(d) N.O.T.
Q. निम्न अनुचुम्बकीय है ? (a) Cu (b) जल (c) Al (d) कोबाल्ट
विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव
28/10/2024
28/10/2024
→ सर्व प्रथम ऑरस्टेड ने बताया कि विद्युत धारा और चुम्बक के
बीच गहरा संबंध है
← गतिशील आवेश विद्युतीय और चुम्बकीय दोनों क्षेत्र उत्पन्न
→ समान दिशा में धारा प्रवाहित होने पर आकर्षण होता है
→ आकर्षण
← प्रतिकर्षण
बीच गहरा संबंध है
← गतिशील आवेश विद्युतीय और चुम्बकीय दोनों क्षेत्र उत्पन्न
→ समान दिशा में धारा प्रवाहित होने पर आकर्षण होता है
→ आकर्षण
← प्रतिकर्षण
- मेक्सवेल के दायें हाथ का नियम इन्होंने ने कहा धारा की दिशा में अंगूठा रहने पर बाकी अन्य अंगुलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताता है
(5)
परिनालिका यह एक खोखली नली है जिसके ऊपर पतले तार की लपेटी जाती है, जब उससे विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं तो इसके अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का निर्माण होता है।
परिनालिका यह एक खोखली नली है जिसके ऊपर पतले तार की लपेटी जाती है, जब उससे विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं तो इसके अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का निर्माण होता है।
परिनालिका एक खोखली
बनली है, जिसके लम्बाई
मान बहुत कम होता है।
बनली है, जिसके लम्बाई
मान बहुत कम होता है।
→ इस्पात से स्थायी चुम्बक बनता है। स्पीकर में प्रयुक्त.
नरम लोहा से अस्थायी चुम्बक बनता है । विद्युत घंटी तथा विद्युत चुम्बक बनाने में
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण- जब किसी चुम्बक और कुंडली के बीच आपेक्षिक गति होता है तो इससे विद्युत धारा निकलती है, इस घटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं। Ex - डायनमो / विद्युत जनित्र
डायनमो / विद्युत जनित्र यह एक प्रकार का विद्युतीय उपकरण है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसका खोज माइकल फैराडे ने किया । यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह AC और DC दोनों तरह की धारा देता है।
उत्सन्न करता है।
N
AC डायनेमों में दो अलग-अलग पूर्ण वलय होता है।
DC में
अधवलय होता है।
कमोटर - यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।
→ यह AC और DC दोनों के लिए काम करता है।
→ यह विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करता है।
(फ्लेमिंग)
बायें हाथ के नियम मोटर के लिए
दाँये हाथ के नियम डायनेमो होकर के
N
AC डायनेमों में दो अलग-अलग पूर्ण वलय होता है।
DC में
अधवलय होता है।
कमोटर - यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।
→ यह AC और DC दोनों के लिए काम करता है।
→ यह विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करता है।
(फ्लेमिंग)
बायें हाथ के नियम मोटर के लिए
दाँये हाथ के नियम डायनेमो होकर के
- फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम इनके अनुसार हाथ के तीन अंगुली जब बाएँ हाथ तर्जनी और अंगुठा को उसप्रोतर लम्बवत फैलाते है कि मध्यमा धारा की दिशा तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा तथा अंगुठा चालक पर लगने बाला बल को प्रेरित करता है।
- डायनेमों किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
(a) विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव
(b) विद्युतीय प्रेरण
(c) चुम्बकीय प्रेरण
→ इस नियम के अनुसार दाएं हाथ के तीन अंगुली मध्यमा तर्जनी तथा अंगुठा को परस्पर उस प्रकार लम्बवत फैलाते हैं कि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र में दिशा, अंगुठा- चालक पर लगने वाले बल की दिशा ' मध्यमा- प्रेरित धारा की दिशा को बताता है।
(b) विद्युतीय प्रेरण
(c) चुम्बकीय प्रेरण
→ इस नियम के अनुसार दाएं हाथ के तीन अंगुली मध्यमा तर्जनी तथा अंगुठा को परस्पर उस प्रकार लम्बवत फैलाते हैं कि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र में दिशा, अंगुठा- चालक पर लगने वाले बल की दिशा ' मध्यमा- प्रेरित धारा की दिशा को बताता है।
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण में प्रेरण में प्रेरित धारा धारा उत्पना होगा?
(ब) कुण्डली के अंदर चम्बक रखने से
(७) चुम्बक के अंदर कुंडली रखने से
(८) दोनों N.O.T."
लेंज का नियम इससे प्रेरित द्वारा की दिशा ज्ञात करते
चुम्बक - कॅडली के गति से उत्पन्न धारा
लेंज के नियम में ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन होता है।
→ लेंज के नियम के अनुसार - प्रेरित धारा की दिशा इयु प्रकार होती कि वह जिस स्त्रोत से उत्पन्न होता उसी स्रोत का विरोध करता है।
G
8.
किसी कुंडल से किसी चुम्बक के उ० ध्रुव को दूर ले
जाया जाता है तो कुंडलो. कुडलाम धारा उत्पन्न होगा)
(a) दायाँ वर्त
(b) बाया वर्त
(c) Both
(d) N.O.T.
(ब) कुण्डली के अंदर चम्बक रखने से
(७) चुम्बक के अंदर कुंडली रखने से
(८) दोनों N.O.T."
लेंज का नियम इससे प्रेरित द्वारा की दिशा ज्ञात करते
चुम्बक - कॅडली के गति से उत्पन्न धारा
लेंज के नियम में ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन होता है।
→ लेंज के नियम के अनुसार - प्रेरित धारा की दिशा इयु प्रकार होती कि वह जिस स्त्रोत से उत्पन्न होता उसी स्रोत का विरोध करता है।
G
8.
किसी कुंडल से किसी चुम्बक के उ० ध्रुव को दूर ले
जाया जाता है तो कुंडलो. कुडलाम धारा उत्पन्न होगा)
(a) दायाँ वर्त
(b) बाया वर्त
(c) Both
(d) N.O.T.
